ये है कंगना रनौत की मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी छोड़ने की वजह? सोनू सूद ने बताया

2019 में रिपब्लिक डे के मौके पर रिलीज हो रही कंगना रनौत की मोस्ट अवेटेड फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी चर्चा में है. कंगना स्टारर मूवी को सोनू सूद ने बीच में ही छोड़ दिया था. सोनू के अचानक बाहर होने की वजह कंगना का डायरेक्शन बताया गया. अब एक्टर ने बॉलीवुड हंगामा को दिए एक इंटरव्यू में मणिकर्णिका छोड़ने की असली वजह का खुलासा किया है.

सोनू सूद ने बताया, रीशूट और शूटिंग शेड्यूल की वजह से उन्होंने मूवी से किनारा किया. एक्टर ने कहा- ''जब डायरेक्टर और कंगना रनौत के बीच चीजें खराब हुईं तो वे फिल्म दोबारा से शूट करना चाहते थे. तब मैंने पूछा कि क्या रीशूट करना है? क्योंकि मैं कुछ ही सीन्स रीशूट कर सकता था, जो जरूरी थे. एडिटिंग के बाद मूवी देखने पर मैंने महसूस किया कि जो सीन मैंने शूट किए थे वे गायब थे. इस बात ने मुझे बहुत डिस्टर्ब किया.''

बकौल सोनू, ''मैंने शिद्दत और मेहनत के साथ उन सीन्स को शूट किया गया था. लेकिन जब मुझे फिल्म के कुछ हिस्सों के लिए दोबारा से शूट करने को कहा गया तो मैंने सही महसूस नहीं किया.'' इसके बाद एक्टर ने मूवी छोड़ दी थी. बता दें कि मणिकर्णिका में सोनू सूद के रोल को अब मोहम्मद जीशान अयूब निभा रहे हैं.

मणिकर्णिका में कंगना के अलावा डैनी, अंकिता लोखंडे, सुरेश ओबेराय, कुलभूषण खरबंदा नजर आएंगे. फिल्म के दो गाने "विजयी भव" और "भारत" रिलीज हो चुके हैं. मणिकर्णिका को कंगना ने निर्देशक कृष के साथ मिलकर डायरेक्ट किया है. ये एक्ट्रेस की पहली पीरियड फिल्म है. मूवी में कंगना रानी लक्ष्मीबाई के रोल में जबदस्त एक्शन करती दिखेंगी.

मणिकर्णिका 25 जनवरी को रिलीज होगी. बॉक्स ऑफिस पर कंगना की फिल्म शिवसेना के संस्थापक बाल साहब ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्म "ठाकरे" से टकराएगी. हालांकि दोनों फिल्मों का सब्ज्केट एकदम अलग है. बॉक्स ऑफिस क्लैश पर कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा था- "हमें न तो किसी ने फिल्म की रिलीज़ डेट को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया और न ही हम किसी भी तरह का दबाव महसूस कर रहे हैं.''

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा था कि समय के साथ अश्लीलता की परिभाषा भी बदल गई है. पुरानी फिल्मों में चुंबन और प्यार भरे दृश्यों के लिए दो फूलों का मिलना और दो पंछियों का चहचहाना दिखाया जाता था, लेकिन अभी के समाज में लिव-इन को भी कुछ हद तक स्वीकार किया जाता है. देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई डांस बार पर लगाए गए प्रतिबंधों को न्यायसंगत ठहराते हुए कहा था कि ये नियम इन क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए है.

दरअसल, डांस बार मालिकों को किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक संस्था से एक किलोमीटर की दूरी पर डांस बार बनाने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद डांस बार मालिकों की ओर से इस तरह की प्रतिबंध पर आपत्ति जताई गई और मामला कोर्ट में पहुंच गया. उन्होंने दावा किया है कि बड़े शहरों में इन नियमों का पालन करना संभव नहीं है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि 11.30 बजे से डांस बार को बंद करने का एक और प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है, जबकि केंद्र सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे चलाए जाने की अनुमति दे रखी है. डांस बार मालिकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनका लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जा रहा है. नए लाइसेंस भी नहीं दिए जा रहे.

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