आंटी किसको बोला? और जाह्नवी कपूर को स्मृति ईरानी से मांगनी पड़ी माफी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो शेयर होते ही वायरल हो गया है. इसमें स्मृति, दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी की बेटी धड़क फेम स्टार जाह्नवी कपूर के साथ नजर आ रही हैं. पोस्ट के साथ स्मृति ने जो कैप्शन लिखा है वो चर्चा में हैं. खबर लिखे जाने तक पोस्ट को करीब 2 लाख व्यू मिल चुके हैं.

दरअसल, हाल ही में स्मृति और जाह्नवी की मुलाकात हुई. इस दौरान जाह्नवी ने उन्हें आंटी कहकर बुलाया. जाह्नवी ने प्यार से उनसे माफी भी मांगी. स्मृति ने पोस्ट करते हुए कैप्शन लिखा, 'कोई मुझे शूट कर दे’ वाला पल- ‘जब जाह्नवी कपूर ने लगातार आंटी कहने पर बहुत ही प्यार से माफी मांगी और आपको कहना पड़े- 'कोई बात नहीं बेटा.’ ये आजकल के बच्चे. #auntykiskobola.

बता दें कि स्मृति अक्सर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती हैं. हाल ही में स्मृति ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट की थी. इंस्टाग्राम पोस्ट में डाली गई तस्वीर में स्मृति ईरानी और उनके पति जुबिन ईरानी सीढ़ियों पर बैठे हुए थे.

स्मृति लाल साड़ी में थीं और एक बबल में लिखा हुआ है- 'हे भगवान उठा ले... मुझे नहीं मेरे वजन को उठा ले.' वहीं, उनके पति को सोचते हुए दिखाया गया- 'इसको भी उठा ले तो चलेगा.'

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की तस्वीरों का इंतजार करते हुए भी स्मृति ने एक फनी पोस्ट किया था. उन्होंने पोस्ट करते हुए  कैप्शन में लिखा- ''जब आपने दीपवीर की शादी की तस्वीरों का लंबे समय तक इंतजार किया हो.'' उनका ये पोस्ट बेहद वायरल हुआ था.

पुराना अडल्ट्री क़ानून 1860 में बना था. आईपीसी की धारा 497 में इसे पारिभाषित करते हुए कहा गया था, अगर कोई मर्द किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, तो पति की शिकायत पर इस मामले में पुरुष को अडल्ट्री क़ानून के तहत आरोप लगाकर मुक़दमा चलाया जा सकता था. ऐसा करने पर पुरुष को पांच साल की क़ैद और जुर्माना या फिर दोनों ही सज़ा का प्रावधान भी था. हालांकि इस क़ानून में एक पेंच यह भी था कि अगर कोई शादीशुदा मर्द किसी कुंवारी या विधवा औरत से शारीरिक संबंध बनाता है तो वह अडल्ट्री के तहत दोषी नहीं माना जाता था.

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटी
एक जनहित याचिका पर 12 साल तक चली सुनवाई के बाद सितम्बर में आख़िरकार सर्वोच्च न्यायालय ने केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी. हिंदुओं के एक प्रमुख तीर्थ स्थल के तौर पर पहचाने जाने वाले सबरीमला मंदिर में सैकड़ों सालों से माहवारी की उम्र वाली महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहा है.

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